Naseeba : नसीबा

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अंजाम

किसी को दीवाना,  किसे नाशाद दिखता हूँ |

मैं तो अश्कों से उल्फतअंजाम लिखता हूँ ||

बचाते हैं क्यों सब दामन मुझसे ज़माने वाले ,

मैं तो अपनी आँखों में बरसात लिए फिरता हूँ ||

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उम्मेद देवल

Faag:फाग

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होली है

खेलत फाग भरे अनुराग , रचावत रास अनूप बिहारी |

बाजत चंग,मृदंग मनोहर , बांसुरियां धुन पे बलिहारी ||

नाचत भाव विभोर हुई, अति रीझ सुनावत केशव गारी |

गाल गुलाल लगावत मोहन, मारत है सखियाँ पिचकारी ||

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उम्मेद देवल

Hori Re Rasiya : होरी रे रसिया

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होलि2

मोहन बिलमावत नैनन सूं ,मुसकावत घूंघट के पट गोरी |

आज दिई बिसराय सभी, कुलकानि तजे करती बरजोरी ||

जी भर के रँग प्रीत लगावत ,  गाल गुलाल लगावत थोरी |

मान बुरा न कछू मन मांहिन, है रसिया मन भावन होरी ||

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उम्मेद देवल

Holi : होली

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होली

फागुन रंग, अबीर उड़े, उर जोर हिलोर उठे हर टोली |

खेलत फाग मनोहर मादक, ले रसिया भर रंगन झोली ||

बांकपनू हर छैल लखावत  ,  है मदमावत सूरत भोली |

छाय गुलालन अम्बर में घट, प्रीत सुधा बरसावत होली ||

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उम्मेद देवल

Rawayat: रवायत

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रवाँ लहू के साथ अब, नुक्ताचीं की आदतें |

माहिर हर शख्स हुआ, करने में शिकायतें ||

मसले से पहले कीजिये, गैरों को दरकिनार |

खडी है कितनी देखिये, अपनों की अदावतें ||  

बुढापे से पहले ही जो, देती हैं झुका कमर |

जीने न देती सुकून से, समाजों की रवायतें ||

खिले हैं पुर शान से, ये गुल खारों के बीच में |

मिलती है हर एक को, कुदरत की नियामतें ||    

नाज़ो  सितम उठाइए, आशिक़ी काफ़ी नहीं |

होती कहाँ इस हुस्न की, हुज़ूर यूँ ही इनायतें  ||

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उम्मेद देवल

Aagosh :आगोश

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आगोश-ए- फलक से तो, फकत बरसात हुई है |

बुलंदियाँ तो धरती की कोख से, तामीरात हुई हैं ||

परस्तिश इल्म की जब भी, यहाँ इंसान ने की है |

सनद है तारीखें सारी, तब-तब करामात हुई है ||

होती कहाँ कुछ कहने को, दरकार लफ़्ज़ों की |

देखा है नज़रों की नज़रों से, अक्सर बात हुई है ||

दूरियाँ अब तलक कायम, जो तकसीम दर्जों से |

मशरिक की कब मगरिब से, मुलाक़ात हुई है ||

ज़ाबिता-ए-मुल्क उसूलन, हैं जब दोगले चलते |

घुला है ज़हर फिज़ाओं में, बदतर हयात हुई है ||

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उम्मेद देवल

Basant:बसंत

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शोभित है रंग पीत धरा,अरु घूमत है खुशियाँ हर द्वारे |

कोकिल की हद कूक सुहावन,मोर मनोहर नाम पुकारे ||

गूंजत है अलि तान दसों दिस, फूलन को मुख चूमत सारे |

नीरस तो रह तो जग जीवन, या सच एक बसंत बिना रे ||

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उम्मेद देवल

Fitrat: फ़ितरत

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romance

हरेक वादा मुस्कुरा के, मासूमियत से छल गया |

निज़ाम मेरे मुल्क का, ये राह किस पे चल गया ||

कल तक था जो मेरी, सरपरस्ती का तलबगार |

आज वो मुर्शिद बना, वक़्त कितना बदल गया ||

जलते हैं पाँव छाँव में, हम तलाशे कहाँ सुकून |

लगता है जिगर धरती का, अपनों से जल गया ||

फितरत है मौसमों की, कुछ ताज्जुब नहीं होता |

हैरां हूँ देख के उसे, वो आगे इनसे निकल गया ||

सब दे रहे थे नसीहतें, खड़े साहिल पे तमाशाई |

हौसला तो उसका था, जो तूफां में संभल गया ||

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उम्मेद देवल

Kaman :कामण

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भावार्थ :- नायिका अपने प्रियतम से कह रही है कि मैं सच्चा कामण (वशीकरण ) तभी समझूँगी जब आप भारी बरसात की परवाह किये बिना भीगते हुए आँखों में प्यार लिए मेरे पास आयेंगे |

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उम्मेद देवल

Adhoore : अधूरे

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मोहन तीर खड़े तनुजा, अति होय अधीर पुकारत राधे |

मो मुरली सुर नाम बिना तुम, ना सधते बहु भॉँतिन साधे ||

कारज एक सरे जग नाहिन, जो हरि साथ न तो अवराधे |

केशव हैं वृषभानु लली बिन, पूरण होकर भी सच आधे ||

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उम्मेद देवल