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शिव

राजत भाल मयंक मनोहर, सर्पन माल गले अति प्यारी।

धार बहे नित गंग जटा बिच, लोचन तीन ललाट मखारी।।

शैल सुता अँग वाम विराजत, गोद गजानन मंगलकारी।

छोड़ सभी छल छंदन को मन, नाम सदा शिव है शुभकारी।।

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उम्मेद देवल

 

 

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