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2016-11-22_uproar54

 

खुद हाथ डुबोय दई लुटिया, बिखरी गरिमा तिनका तिनका |

जब आपहि कारज हीन करे, इसमें फिर दोष भला किनका ||

मुख आदर लानत पीठ मिले, सच जान गई जनता जिनका |

अब मंच रु पंचन साख नहीं , रह केवल नाम गया इनका ||

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उम्मेद देवल

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