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अचूक

मोद भरी सिणगार सजे, पिव कारण कामण तो सुकुमारी |

शोभित हास अलौकिल होंठन, राजत नैनन केसर क्यारी ||

कानन कुंडल हार हिया पर, चीर छटा अति रूप निखारी |

बोल पड़ी तब पाँवन पायल, मार अचूक है आज तिहारी ||

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उम्मेद देवल

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