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होलि2

मोहन बिलमावत नैनन सूं ,मुसकावत घूंघट के पट गोरी |

आज दिई बिसराय सभी, कुलकानि तजे करती बरजोरी ||

जी भर के रँग प्रीत लगावत ,  गाल गुलाल लगावत थोरी |

मान बुरा न कछू मन मांहिन, है रसिया मन भावन होरी ||

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उम्मेद देवल

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