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पन्नों में नहीं, सच में जब तक, जन उत्कर्ष नहीं होगा |

नव वर्ष तो होगा लेकिन, फिर भी नव वर्ष नहीं होगा ||

रीत पुरातन यही रही, रूढी ने नव का प्रतिकार किया |

हित जिनके होते बाधित, उनने जी भर दुष्प्रचार किया |

समय कसौटी बतलाएगी, क्या छीना क्या उपहार दिया |

एक अतुलित परिवर्तन का,जन-मन में हर्ष नहीं होगा |

नव वर्ष तो होगा लेकिन, फिर भी नव वर्ष नहीं होगा ||

मिथ्या तो जल अंजुली का, नहीं देर तलक है टिक पाता |

वादा वाक् मात्र भर होता, है इतिहास इरादा रच जाता ||

ढह जाते हैं तब दुर्ग दंभ के, जब मुखर मौन है हो जाता |

हितकर संकल्पों का, कुत्सित सोचों से संघर्ष नहीं होगा |

नव वर्ष तो होगा लेकिन, फिर भी नव वर्ष नहीं होगा ||

गुण का पक्ष,विपक्ष अवगुण का, होगा जब परिपाटी में |

भाषा,लिंग,धर्म,क्षेत्र के दंश, चुभें ना देश की छाती में |

लोकतंत्र का द्रुम फलित तब, होगा भारत की मांटी में |

घाटी में तिरंगा फहराने का, जो कार्य सहर्ष नहीं होगा |

नव वर्ष तो होगा लेकिन, फिर भी नव वर्ष नहीं होगा ||

photo

उम्मेद देवल

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