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255-hindi-shayari-in-255

ज़िंदगी में कोई गम नहीं होते,गर तुम नहीं होते |

हम होते मगर हम नहीं होते,गर तुम नहीं होते ||

गुज़र जाएगी कैसे भी, मिली है चार दिन की ये,

मज़ा मगर नहींआता, गर ये सितम नहीं होते ||

लाते ना तसव्वुर में  हम, भूले से कभी तुमको

जो गुज़िश्ता वक़्त के लम्हे,गर कम नहीं होते ||

चले कू-ए-यार की जानिब, उम्मीदे वफा लेकर,

मिटते नहीं अरमां, बेवफा गर सनम नहीं होते ||

दम -दम पे कैसे दम निकले, ये इल्म ना होता,

कभी जान ना पाते, गर वो हमदम नहीं होते ||

मिलेंगें ख़ाक में लेकिन, जुस्तजू एक ये होगी,

देते सदा तुझको,गर अहल-ए-अदम नहीं होते ||

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उम्मेद देवल

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