Tags

, , , , , , ,

bichhudan

निःशब्द जुबां है, आँखें नम

रोता है दिल, मुस्काते हम ||

है कौनसा दिन, जिसकी रात नहीं,

जायेंगे विछुड़ कब ज्ञात नहीं |

साँसें तो सलामत है लेकिन,

निः शेष हुआ, लगता है दम |

निःशब्द जुबां है, आँखें नम ||

चहरे हैं खिले, मुरझाये मन,

सावन के संग ये कैसी अगन |

खुशियों की घटा, गम की बूँदें,

ना समझ पड़े कैसा मौसम |

निःशब्द जुबां है, आँखें नम ||

करते हैं बातें हँस-हँस के,

गम पीते जुदाई छुप-छुप के |

खुशियों में पसरी ख़ामोशी,

photo

उम्मेद देवल

                                    उलझन से भरा है ये आलम |

                                  निःशब्द जुबां है,आँखें नम ||

Advertisements