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eyes

उजड़े हों इश्क़ में बेशक़, यादों से आबाद रहते हैं |
छुपा कर दर्दे दिल सारे, सनम हम शाद रहते हैं ||
हुए हम बर्बाद जिनसे थे, हैं हज़ारों कोशिशें करते |
मगर भुलाये ही नहीं जाते, वो लम्हें याद रहते हैं ||
इन ख़्वाबों के खंडहर में, उन अरमानों का डेरा है |
जो मुक्कमल हो नहीं पाए, लिए फ़रियाद रहते हैं ||
वो मंजर साथ जो तेरे, हमें हसीं सौग़ात लगते थे |
वही अब साथ बिन तेरे, सूरत-ए-उफ़्ताद रहते हैं ||
इक हम ही हैं जिनको, न दिल को तोडना आया |
इस फन के यहाँ तो, आलिम औ”उस्ताद रहते हैं ||

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उम्मेद देवल

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