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ख्वाब मेरे पर तेरा क्यों, उनमें सदा ख़याल है |
कचोटते रात-दिन, अनसुलझे कुछ सवाल हैं ||
बीतता है दिन रात के, रात दिन के इंतज़ार में |
करार न है पल कहीं, अपना तो क्यूँ ये हाल है ||
उजालों में अश्कों का डर , अँधेरों में तन्हाईयाँ |
इन यादों ने तेरी बेवफ़ा, जीना किया मुहाल है ||
नज़रें उन्होंने बदली क्या, सब नज़ारे बदल गए |
लगने लगा अब धूल सा , ये चहरे का गुलाल है ||
हुश्ने तसव्वुर में खो गए , होश न कुछ भी रहा |
हकीकत जान न पाये, हमको तो यह मलाल है ||

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उम्मेद देवल

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