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जल रहे पाँव, पर चल रहे, इक छांह की तलाश है |

अडचने बड़ी, राहें रोके हैं खड़ी, संग मगर आस है ||

कोहरे कुछ इस कदर घने , उस पार देखते ना बने |

बेबस है नज़र,ना थकी है मगर, कोशिशें सायास है ||

तम लेने को आगोश में, त्वरित बढ़ रहा है जोश में |

एक नन्ही किरण, जो है मेरे मन, दे रही उजास है ||

दिल कचोटती बहु पीड़ है, ये अपने या फिर भीड़ है |

होगा अपनत्व संचरण,अवश्य मन, निरंतर प्रयास है ||

आज उजड़ रहा जो चमन, कल खिलेंगे सुन्दर सुमन |

उर में उमंग भर, गूंजेंगे कोकिल स्वर, ये विश्वास है ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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