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आँसू दरिया बन गये , निश दिन बहते बहते |

कितने अफ़साने हो गये , यूं ही कहते कहते ||

सितम तेरे बढ़ते गये, शोखी से कुछ नाज़ से |

और हम दीवाने हो गये , उनको सहते सहते ||

तूने भुलाया पर हमें , तुझ बिन कुछ ना याद |

अरे खुद से बेगाने हो गये, खुद संग रहते रहते ||

इकबर ना सुनी तुमने सनम, मेरी कोई फ़रियाद |

कितने ज़माने हो गये, तुझे दिलबर कहते कहते ||

जी तो रहे हैं हम सनम , पर जीना हुआ मुहाल |

घायल सब सपने हुये , तेरे नश्तर सहते सहते ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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