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sad_path_by_eddyrichie-d4pltqs

उजड़े हुए दिल में, अब तो यादे रहगुज़र है |                                     

मायूसियाँ मुकद्दर , तन्हाई हमसफ़र है ||

भटक  रहे  हैं तलाशते , सपनों  के कारवाँ |

मंजिले जहां मक़सूद थी , कहाँ वो शहर है ||

ज़माने की छोडिये , जहां बदलते रात दिन |

मुझको मिली रात वो, जिसकी ना सहर है ||

तिनका- तिनका हुआ , लुत्फ़-ए- आशियाँ |

बरपा नहीं कुदरत से, ये अपनों का कहर है ||

चाहतों के सिलसिले भी , जहाँ में अज़ीब हैं |

क़ातिल के सज़दे में , रहती लगी नज़र है ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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