Tags

, , , , , ,

25158

वक़्त की आँधियों में, पन्ने जिंदगी के बिखर गये |

जहाँ हम शाद रहते थे, वो लम्हे जाने किधर गये ||

पड़े हैं सूखे पत्तों से बिखरे, दिल के ख्व़ाब सब मेरे |

ज़माने के संगदिल पाँव , उनको रौंधते गुज़र गये ||

तन्हाईयों में दीवाने अक्सर, यादे महफ़िल सजाते हैं |

बेरुख़ी नसीबा देखिये मेरी, यहाँ भी वो बचकर गये ||

गर साँस का चलना ही ज़िन्दगी, तो जी रहे हैं हम |

वरना अरमानों को वो, कफ़न कब का पहनाकर गये ||

हँस लीजिये ज़ी भर आप भी , उनको तो शुकूं मिले |

जो रंग बर्बादी नसीब मेरे, प्यार से मिलकर भर गये ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

Advertisements