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चल रहा हूँ बेसबब , ना लक्ष्य है, ना हमसफ़र |

बस साथ मेरे चल रही, ये भटकती सी जिंदगी ||

अब टूटे सारे ख्व़ाब हैं, लगे चहरे यहाँ नक़ाब हैं |

कब अपना कोई लूट ले, ये बहकती सी जिंदगी ||

हैं हज़ार धोखे प्यार में , इज़हार में , इकरार में |

वो प्रीत शूल ह्रदय चुभी, ये खटकती सी जिंदगी ||

खिले- खिले हैं जो मिले , दे खार के सिले गए |

डर लगता अब बहार से, ये सहमती सी जिंदगी ||

उदास प्यास पास है, इक हताश उर में आस है |

बस संवर जाये बार इक, ये उजडती सी जिंदगी ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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