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पल ना चैन चित में है, संजोये स्वप्न नैनन में |

खड़ी मग देखती मोहन, मनो राधा है उपवन में ||

ये रीति प्रीति की कैसी,जहाँ जलना मुकद्दर है |

मिला ना वो जिसे चाहा, है अधूरापन जीवन में ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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