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Ambition_0

आया जब अपनी पर इंसा, देवों के नमन को देखा है |

उसके दृढ इरादों आगे, हमने झुकते गगन को देखा है ||

नभ को छूती वो लहरें, प्रतिकृति बन उठती प्रलय की |

केवट निश्चय के आगे , बंद सागर का नर्तन देखा है ||

ठान लिई जिद करने की, असंभव फिर तो कुछ भी ना |

तपते, जलते सहरा में, उस खिलते गुलशन को देखा है ||

ताने सीना अटल, अचल, बाधा बन पथ में अड़ा खड़ा |

वो गिरी गिरा झुक क़दमों में,विजयी चरण को देखा है ||

जो बढे बना इतिहास गए, भूगोल बदल जग का डाला |

बंधन में तो अक्सर हमने, हसरत के पतन को देखा है ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

 

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