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राधे  तेरे  नयन  में , जादू  है  पुरजोर |

सकल चराचर नाथ भी, बैठे बन कमज़ोर ||

रूप माधुरी लख रहे , होकर भाव विभोर |

सन्मुख राधा दीन बन, बैठे नन्द किशोर ||

नारी नैन वशीकरण,सहज लेय चित चोर |

माया पति को मोहती, कजली नैना कोर ||

प्रीत की रीती देखकर, अचरज होता घोर |

दाता तीनों लोक के, याचक नन्द किशोर ||

जब देवों के वश नहीं, कहाँ मनुज का जोर |

तीन लोक के नाथ भी ,बैठे घुटनों ओर ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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