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कसमसाती  ज़िन्दगी, करवटें  लेती  रही |

बेइंतहा  यादें  तेरी , दस्तकें  देती  रही ||

जानता दिल बाखूबी, अब ना वो अपने रहे |

पर तमन्ना रेत पे , कश्तियाँ  खेती  रही ||

मान ले इस बात को, अब हकीकत है यही |

मेरे दिल से,तेरे दिल की, बेबसी कहती रही ||

आग दिल में जो लगी, ख़ाक सब अरमां हुए |

इक नदी खामोश सी , आँखों से बहती रही ||

जानती मैले हुए, अब ना इनमें में ज़िन्दगी |

बावरी इक आस ले, चिड़िया उन्हें सेती रही ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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