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आँगन प्राची रवि उदित, सिन्दूरी सँग लाल |

सुखकर वैसे शोभति , बिंदी  तेरे  भाल ||

अधर मधुर हैं रस भरे, नैन सुधा के ताल |

पर उर में मद घोलती, बिंदी  तेरे  भाल ||

बैरागी मन भी हुवे , अनुरागित हर हाल |

वशीकरण इक मन्त्र सी, बिंदी  तेरे  भाल ||

आखेटक  मृग  फांसने , जैसे डाले जाल |

चंचल  नैना  पाश है , बिंदी  तेरे  भाल ||

आनन कोष अनूप पा , होता  मालामाल |

सच में ही अनमोल है , बिंदी तेरे भाल ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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