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मन पांखी परदार है , उड़े पिया की ओर |
मैं बेबस , बेपर सखी , बैठी हूँ इक ठौर ||
मन चंचल परवाज़ भर, पहुँचे पिव के पास |
पंख विहीन नैना सखी, निशिदिन रहे उदास ||
पल पल मिलता मन सखी, उड़ उड़ पिव के देश |
पर नैना दीदार बिन , कल न पड़े लवलेश ||
हाय दई मन पंख क्यूँ , तूँ ने दिए लगाय |
ये उड़ साजन संग जा , रहता मुझे सताय ||
मन सुधि लाता पीव की , आतुर होते नैन |
व्याकुल चित को हे सखी, दरस बिना ना चैन ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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