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our_time_is_running_out__by_vermilionx

योगी, योग, प्रयोग से, सायास से या संयोग से |

रुका ना पल है एक भी, इस वक़्त के प्रवाह का ||

ये चल रहा है बिना रुके, नहीं देखता है पलट के,

ना कोई रिश्ता दूर का, ना मीत कोई निकट के |

ना हर्ष से अभिभूत है, ना कोई असर है आह का,

रुका ना पल है एक भी, इस वक़्त के प्रवाह का ||

मिलता सभी को है मगर, रुकता किसी के पास ना,

सदा समभाव सकल से, कभी किसी का ख़ास ना |

नहीं मिन्नत, मनौती मानता, ना असर सलाह का,

रुका ना पल है एक भी, इस वक़्त के प्रवाह का ||

वे ही हैं अक्सर हारते, जो रह बैठ अवसर तलाशते,

कर्मयोगी चढ़ते पीठ पे, इस बेहताशा वक़्त भागते |

पथ में पर्वत सम भी है, ये प्रकाश भी है राह का |

रुका ना पल है एक भी, इस वक़्त के प्रवाह का ||

प्रत्येक क्षण संग बह, ना एक पल भी रुक के रह,

फिर हाथ कभी ना आएगी, गुजर गई जो यह शह |

बाँटता पुरुष्कार पुरषार्थ का, देता दंड भी गुनाह का,

रुका ना पल है एक भी, इस वक़्त के प्रवाह का ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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