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तप भागीरथ सूं उतरी, अमृत नीर सरावे है |

गुण राशि माँ गंगा, जद जगड़ो जस गावे है ||

थारी कीरत सुन माता, नीर घनेरो आय मिले,

रळियाँ पाछै कठे अलग, गंग नीर कहावे है ||

तूँ मान बढायो नाला रो, बां री के खिमता है,

भाग सरावन खुद रो बे तो, थारे कने आवे है ||

थारी कीरत सदा अमर, कोई चाहे ज्यो कह ले,

ओलखाण है, माँ है तूँ, अमृत पान करावे है ||

बुरा नहीं नादान अवस है, पण थारा ही बेटा है,

ज्यो थारो जस भूल मात, गुण नाला रा गावे है ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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