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शिरोधार्य रज उसकी है, जो पाँव अपाहिज संग चला |

उसने जल, जीवन पाया, जो राह अंधियारी दीप जला ||

सुमन विविध हैं उपवन खिलते, नाना सौरभ रंग लिए |

कहाँ मुकाबिल कोई उसके, जो पत्थरों के बीच खिला ||

प्रचंड प्रभंजन तरु अनेकों, तिनके से उड़ा निकलता है |

पाता सुयश वही तो है, जो जड़ अपनी से नहीं हिला ||

विपदाओं के घोर व्यूह, आते पथ विचलित करने को |

नमन उसे जग करता है, जो पथ अपने से नहीं टला ||

अनगिन सीपी सागर भीतर, वर्ण, नस्ल सब एक लिए |

विश्व विदित है मूल्य उसीका, मुक्ता जिसके बीच पला ||

साँसों की चलती सरगम पर, हर मानव राग बजाता है |

संगीत हुआ है वही अमर, जिसने जग का किया भला ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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