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आओ हम वहां चले, जहां नभ, धरा मिलें ||

जहाँ न हो गिले, बस प्यार के प्रसून खिले ||

नीड़ नीड़ गीत हो, जहां पाँव पाँव प्रीत हो |

सांस का संगीत हो, सभी जहां पे मीत हो |

चमक आँख आँख में, लब ख़ुशी से खिले |

आओ हम वहां चले, जहां नभ, धरा मिले ||

शीतल बहती बयार हो, मृदुल नीर धार हो |

ना दिलों में खार हो, अपनत्व बेशुमार हो ||

स्वतंत्र भाव झूमते, ना हो बंदिशों के किले |

आओ हम वहां चले, जहां नभ, धरा मिले ||

स्फूर्ति प्राण प्राण में, सभी जीव हों त्राण में |

उमंग अनंत परिमाण में, लक्ष्य ले ध्यान में ||

जहाँ बढ़ते पैर पाने को, अपनी अपनी मंजिलें |

आओ हम वहां चले, जहां नभ, धरा मिले ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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