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Hand open the jalousie. Element of design.

अवसादों के बंद कमरे में, आशा की धूप उतरने दे |

खोल, पड़े बंद दरवाज़े, किरणों को ज़रा बिखरने दे ||

सीख, ज्ञान, उलाहने, ताने, देना आदत दुनियाँ की ,

इनके बीच निज सपनों को, सजने और संवरने दे |

अवसादों के बंद कमरे में, आशा की धूप उतरने दे ||

जो भाव ह्रदय के भीतर घुटते, कह ना पाते शब्दों में ,

खिन्न सदा चित्त करते वे, खुलकर उन्हें निकलने दे |

अवसादों के बंद कमरे में, आशा की धूप उतरने दे ||

क्रमशः हार लिखी सोपाने, केवल भ्रम पैदा करने को ,

विजय अंकित आगे चलकर, क़दमों को तो बढ़ने दे |

अवसादों के बंद कमरे में, आशा की धूप उतरने दे ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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