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 CV38

नमामि नाथ चन्द्रमौलि शीश गंग राजितं  |

त्रिनेत्र भाल शोभितं पिनाक हस्त साजितं  ||

ललाम कंठ कालकूट भस्म अंग सोहती |

विराजमान संग गौर कांति चित्त मोहती ||1||

गले अनूप नाग हार मुंड माल राजती |

सुदेह बाघ अम्बरं जटा ज शीश साजती ||

निवास शैल शिख्खरे सवार नन्दि आप हो |

दया निधान आप ही हरो हमेश ताप हो ||2||

नमामि कष्ट भंजनं दयालु मोक्ष दायकं |

नमामि भक्त वत्सलं रहो सदा सहायकं ||

नमामि लोक तारणं शरण्य पाद पंकजं |

हरो हरो हरो हरे महा महा महा अघं ||3||

उमा गणेश कार्तिकेय साथ आप राजते |

अपार भाव सेव धार नांदिया सुशोभिते ||

महा महा महा सुखं ददाति विश्व पालकं |

क्षणं क्षणं क्षणं हरे अनेक भक्त पातकं ||4||

अनंत रूप धारितं अरूप नाथ आप हो |

अनाथ नाथ आप ही हमेश दीन साथ हो ||

करो करो करो दया पुकार चित्त धारिये |

महा समंद बीच हैं महेश आप तारिये ||5||

खड़े सुरेश लोकपाल देव जोड़ हाथ हैं |

कराल काल आपके अधीन भूतनाथ है |

महा अगाध और क्रूर घोर लोक जाल है |

उबार आप लीजिए अबोध तुज्ज बाल हैं ||6||

सुनो पुकार ओंमकार नाथ ध्यान दीजिये |

हरे मखारि सोमनाथ कान टेर कीजिए ||

नहीं नहीं नहीं हमें न और कोई आसरा |

उदार आशुतोष ना समान आप दूसरा ||7||

हमें न अर्चना पता न ज्ञान ध्यान ज्ञात है |

करो हमेश पालना अबोध बाल तात हैं  ||

नमामि नाथ बार बार संग साँस तार के |

गहो दयालु बाँह को उबारने मझार के ||8||

सहित उमा शिव का सदा, धरिये दिल में ध्यान |

अवडर दानी सम अवर, करत न जग कल्याण ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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