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सहमी सहमी आज पड़ी है, चलने को वो गलियाँ चुन |

दिल के इस दरवाज़े पे, खामोश लबों की दस्तक सुन ||

पढ उन आँखों की भाषा ले, कर उनकी दूर हताशा ले |

मुरझाये मनुज मनों के उपवन, उनको नूतन आशा दे |

बिखरे जिनके जीवन सपने, उनको तूँ तो फिर से बुन |

दिल के इस दरवाज़े पे, खामोश लबों की दस्तक सुन ||

बल निर्बल का तूँ बनता जा, दीपक बन तूँ जलता जा |

राह कठिन है नेक मगर है, पथ इस पर तूँ चलता जा ||

सांसों की सरगम साज बजे ये, एक यही हो तेरी धुन |

दिल के इस दरवाज़े पे, खामोश लबों की दस्तक सुन ||

जीवन चंद साँसों का ताना, जान ज़रा क्या खोना पाना |

कर्म इतना ही काफी है, दे रोतो को सिखला मुस्काना ||

हर साँस समर्पित मानवता को, एक सवार यही हो धुन |

दिल के इस दरवाज़े पे, खामोश लबों की दस्तक सुन ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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