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Hopeless (2)

कल और कल के बीच आज, मुझको उसमें जीने दो |

तुमको अपने जाम मुबारक, मुझे अपने प्याले पीने दो ||

उलझ कंटीली झाड़ों में, ये दिल दामन जो चाक हुआ |

बैठ मुझे तन्हाई में, चंद लम्हे फुरसत से सीने दो ||

मझधार, भँवर तो हंसकर, तुम देते मुझको रहते हो |

चीर चले जो धारों को, इक बार तो ऐसे सफीने दो ||

बाकी सारे तुम रख लो, ज्यादा की मुझको चाह नहीं |

दे दो मुझको तुम केवल, जो सावन भादों महीने दो ||

चहरे ये नकाबों वाले तुमने, मुझको तो हर बार दिए |

इंसा की फितरत जो दिखलाए, मुझको वो आईने दो ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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