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sad_rainbow_girl_by_shahinura-d5z413z

ज़ख्मों के हैं निशां दिए, गुल को बहार ने |

लूटे हैं दिलों के कारवाँ, जहाँ में प्यार ने ||

अपने तो सब हो गए, अपना कोई ना रहा |

भटक रहे हैं दर बदर, अपनों को तलाशने ||

दूरियाँ सिमट गई,  बढ़ गए मगर हैं फासले |

वो लौट आई  हर सदा, दी थी जो पुकारने ||

देखिये इस तरह के, तो काम आज हो रहे |

पोंछ रहे है आईने, अपनी सूरते निखारने ||

नाखुदा भी आजकल, खौफे दरिया खा रहे |

लगे हैं अब तो रेत में, किश्तियाँ उतारने ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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