Tags

, , , , , ,

QuoteHelpingOthersThrough

साथ जगत में पल दो पल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल |

प्रभात प्रतिदिन नव आशा लाता, मध्याह्न प्रचंडता देता है |

निस्तेज हो फिर जाता ढल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल ||

मुड़कर ना भूत कभी लौटा है, ये आज ही हाथ तो अपने है |

किसने जाना क्या होगा कल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल ||

साँसों के सागर को प्रतिपल, रहा उड़ा है वक़्त ये भाप बना |

बरसा दे प्रीत बनकर बादल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल ||

सपने सहचर बंद आँखों के, जगते नयनों में सृजन सजता |

तूँ करता चल निर्माण नवल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल ||

बहुतेरे निर्बल, दीन धरा पर, हैं व्यथित, वेदना नित सहते |

आया अवसर बन जा सम्बल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल ||

पथ अवरोध खड़े करने की, इस जग की तो रीति पुरानी है |

खाकर ठोकर हर बार सम्हल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल ||

इस जग में विजेता वो ही रहा, जिसने भी दिलों को जीता है |

आया अवसर ना जाए फ़िसल, बस प्यार बांटता बढ़ता चल ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

Advertisements