Tags

, , , , , ,

chaploos

मुख में मिसरी घोल मनुज, जब होता मतलब मिलते हैं |

ये परभक्षी सुमन सदा ही, निज हित खातिर खिलते हैं ||

गरल उदधि उर भीतर होता, पर वर्षण स्नेह सुधा करते |

कपट छुपा, मुख हास सजा, लफ़्ज़ों में अपनापन रखते ||

दावों के शातिर माहिर होते, ये चालों पर चालें चलते हैं |

मुख में मिसरी घोल मनुज, जब होता मतलब मिलते हैं ||

निर्लज्जता इनका आभूषण, होता स्वाभिमान से बैर सदा |

छुरी किसी भी गले चले पर, हल हो जाए इनका मुद्दा ||

कहा बिसात बेचारे नर की, ये तो छल भगवन से करते हैं |

मुख में मिसरी घोल मनुज, जब होता मतलब मिलते हैं ||

मीठी वाणी और खुशामद इनके, मधुर हास हथियार रहे |

लपक सदा रहते सेवा में, और करते कार्य हैं बिना कहे ||

अपने बनकर रहते हरदम, मतलब सधा तो रंग बदलते हैं |

मुख में मिसरी घोल मनुज, जब होता मतलब मिलते हैं ||

ना नाते, रिश्ते, नैतिकता, बस स्वार्थ से मतलब होता है |

लगा पीठ में खंजर हरदम, संग इनका जब जब होता है ||

दूर नहीं जा देखो इनको, ये अक्सर आस्तीन में पलते हैं |

ये परभक्षी सुमन सदा ही , निज हित खातिर खिलते हैं ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

Advertisements