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traditional indian woman painting detail landscape shallow DOF

तरुनाई तो तन पर आई, पर दिल में बचपन बसता है |

ह्रदय मोम सा पाया तुमने, हल्की सी आँच पिघलता है ||

दुःख दर्द ना देखा जाता तुमसे, झट द्रवित हो जाती हो |

अंजाम की परवाह किये बिना, तुम सबकी पीर बँटाती हो ||

पर खुदगर्ज हैं ये जगवाले, इनके पाप ह्रदय में पलता है |

ह्रदय मोम सा पाया तुमने, हल्की सी आँच पिघलता है ||

भाव पुनीत निर्मल, निश्छल, जो जी आया कह देती हो |

वसुधा सी सहने वाली तुम, हँस पीर सभी सह लेती हो ||

इस मन मंदिर के हर कोने में, दीप प्रेम का जलता है |

ह्रदय मोम सा पाया तुमने, हल्की सी आँच पिघलता है ||

नन्ही बाला सी रूठ कभी, जिद ठान बैठ तुम जाती हो |

और मनाया तुम्हे जरा जो, खुल के फिर मुस्काती हो ||

वही बचपना, वही शरारत, वही शोखी, वही चंचलता है |

ह्रदय मोम सा पाया तुमने, हल्की सी आँच पिघलता है ||

पर ये जग ऐसे लोगों को, पग पग पर हरदम ठगता है |

आप पिलाओ दूध जिन्हें, विष वो नर नाग उगलता है ||

कदम कदम पर जाल बिछें हैं, जा जन भोला फँसता है ||

ह्रदय मोम सा पाया तुमने, हल्की सी आँच पिघलता है ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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