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farhadshirin

चाहता हूँ भुला दूँ याद सभी, पर तस्वीर तेरी दिल में उतरी |

फिर याद तेरी घिर आई है, फिर से ये आँखें सावन बदरी ||

ज़न्नत औ’ बहारां और नहीं, हैं रस से भरे ये नयन तेरे ,

कितनी खता हम कर बैठे बड़ी, थे ये तो लुटेरे दिल नगरी |

फिर याद तेरी घिर आई है, फिर से ये आँखें सावन बदरी ||

कैसी थी घडी जब आँख लड़ी, इस दिल पे खुमारी छाई थी ,

हमें नाज़ नसीबा अपने लगा, पर हाथ लगी गम की गठरी |

फिर याद तेरी घिर आई है, फिर से ये आँखें सावन बदरी ||

वो तेरी हँसी दिल मेरे बसी, जैसे प्यार का सागर पाया हो,

धोखा मिला कुछ और नहीं, मुझको मिली अँसुवन गगरी |

फिर याद तेरी घिर आई है, फिर से ये आँखें सावन बदरी ||

वहाँ आज वीराना पसरा है, ये दिल जो कभी गुलज़ार रहा ,

अब मैं हूँ, मेरी तन्हाई है, किससे कहें जो इस पर गुजरी |

फिर याद तेरी घिर आई है, फिर से ये आँखें सावन बदरी ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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