Tags

, , , , , ,

Father-I-pray

क्यों बैठें दामन थाम निशा का, होती है जब भोर नई |

इक राह भले हो तम से घिरी, पथ आलोकित और कई ||

पात विहीन तरु शाखों ऊपर, नूतन किसलय खिलते हैं |

मरू, हिम, तल सागर में भी, चिन्ह जीवन के मिलते हैं ||

आशा जीवन इसके इंगित, पल-पल,पग-पग हर ओर कहीं |

क्यों बैठें दामन थाम निशा का, होती है जब भोर नई ||

उजड़े नीड़ कई मर्तबा, तृण तृण खग फिर निर्माण करे |

बार सहस्रों गिरे पिपलिका, लक्ष्य आखिर संधान करे ||

हिम्मत, साहस, और हौसला, हार कहो कब कहाँ हुई |

क्यों बैठें दामन थाम निशा का, होती है जब भोर नई ||

घनघोर घटा तम भीतर भी तो, दमक दामिनी रहती है |

कंटक आवृत ड़ार कष्टकर, सुमन सुरभित हो सजती है ||

बीज छुपे दुःख में सुख के, बन पीड़ा फिर आनन्द गई |

क्यों बैठें दामन थाम निशा का, होती है जब भोर नई ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

Advertisements