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देने का ही ज़ज्बा होता है, चाहत में चाह नहीं होती |

होके गुजरती है दिल से, दूजी कोई राह नहीं होती ||

ना शिकवे ना ही फरियादें, ना लब पे दुहाई होती है |

रहती है दुआएँ हरदम ही, भूले से आह नहीं होती  ||

इश्क ही रब, इश्क बंदगी, इश्क ही मज़हब होता है |

बस यार सलामत रहे सदा, बाकी परवाह नहीं होती ||

एक फिज़ा, ना कोई खिज़ां, यारे अहसास जहाँ होता |

उल्फत जो है पाकीज़ा, फिर हयात तबाह नहीं होती ||

एक इबादत, इक सिजदा, लगी लगन बस इक रहती |

रहता दिलबर नाम जुबां पर, आह ना वाह नहीं होती ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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