Tags

, , , , ,

Indian-motifs-24

कोई उपमा देकर तुमको, उस जैसा कैसे बतलाऊं ?

अनुपम हो प्रियवर मेरे, तुम तो केवल हो तुम ही ||

घटा ज़ुल्फ़, वेणी नागिन, शशि आनन सुनता आया,

मिटती, डसती, हर रोज बदलती, कैसे मैं ये कह जाऊं ?

अनुपम हो प्रियवर मेरे, तुम तो केवल हो तुम ही ||

कोकिल बयनी, मृग नयनी, कवि जन कहते आए हैं,

अवसरवादी और चंचला, मैं तुमको तो कहते शरमाऊँ |

अनुपम हो प्रियवर मेरे, तुम तो केवल हो तुम ही ||

कुछ भी कहे परवाह नहीं जग, देखो मेरे नयनों में,

तुम हो समाई, और छवि, कहो कहाँ मैं बिठलाऊँ |

अनुपम हो प्रियवर मेरे, तुम तो केवल हो तुम ही ||

उर, जिह्वा, साँसों को लेकर, हर रोम बसेरा तेरा है,

मैं तेरा कवि, अब तूँ ही बता, और गीत मैं कैसे गाऊँ |

अनुपम हो प्रियवर मेरे, तुम तो केवल हो तुम ही ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

Advertisements