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hard-work

चलना, चलना, बस चलना, ठहरे तो बस ठहर गए |

जीवन की आपा-धापी में, गुजर ये आठों पहर गए ||

ना तो हम अपनी कह पाए, ना अपनों की सुन पाए,

व्यर्थ अर्थ के पीछे पागल, इस शहर से उस शहर गए |

जीवन की आपा-धापी में, गुजर ये आठों पहर गए ||

अपनो से दूर, पराये बन, क्या खोते इसका भान नहीं,

नहीं फुरसत सोचें इतना, हम तो चलकर जिधर गए |

जीवन की आपा-धापी में, गुजर ये आठों पहर गए ||

रिश्ते रहे महज नाम के, है समय कहाँ निभाने का ,

घर, सम्बन्धी सबके रहते, हम बन एकाकी उधर गए |

जीवन की आपा-धापी में, गुजर ये आठों पहर गए ||

अर्थ प्रधान है माना लेकिन, क्या जीवन का मोल नहीं,

साँसों की माला, पल के मोती, बिखरे, फ़िर बिखर गए |

छोड़ यहीं सब, रिक्त करों से, पता ना होगा किधर गए |

जीवन की आपा-धापी में, गुजर ये आठों पहर गए ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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