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Holi_Fest_Krishna_und_Radha

बैर, बुराई, और कलुष को, है इस बार जलाना होली में |

अपनेपन और प्रीत-प्यार के, बस रंग लगाना होली में ||

टूटे छप्पर के भी ऊपर, पड़े भरपूर प्रेम की पिचकारी ,

हुलसित, पुलकित नैन सभी हों, नजर ना आए लाचारी |

स्नेह बांसुरी, समता, ममता के चंग बजाना होली में |

अपनेपन और प्रीत-प्यार के, बस रंग लगाना होली में ||

मर्यादा के रंगों संग में, शील गुलाल लगानी जमकर है,

और चलानी शिष्ट पिचकारी, नैतिक नीर को भरकर है |

उल्लास, उमंग के अबीर, गुलाल, खूब उड़ाना होली में |

अपनेपन और प्रीत-प्यार के, बस रंग लगाना होली में ||

पीकर के हुडदंग मचाना, यह तो होली की रीति नहीं ,

कामुक कर से रंग लगाना, महज वासना, प्रीति नहीं |

मस्ती तो परवान चढ़े पर, बस प्यार लुटाना होली में |

अपनेपन और प्रीत-प्यार के, बस रंग लगाना होली में ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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