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os65

कर पे मेहंदी मंडित है, नयनन कज्जल रेख सँवारी |

पग पैंजनी राजत है, अरु भाल की बिंदी लगे प्यारी ||

सरस सिंगार, वसन तन धारे, मन मुस्काये सुकुमारी |

बैठी टेक लगाय रही ये , निरखत राह है कंत तिहारी ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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