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anticlockwise

संशय, दुविधा नहीं लेश भर, लक्ष्य भले से चिन्हित है |

पथ विपरीत मनुज क्यूँ चलता, यह प्रश्न अनुत्तरित है ||

ईश निवास प्रति घट भीतर, करुणा पर्याय परमेश्वर है,

हिंसा पथ जग अनुगामी, जबकि हित अहिंसा निहित है |

पथ विपरीत मनुज क्यूँ चलता, यह प्रश्न अनुत्तरित है ||

सनयन तथापि होकर अन्धे, सब जन ज़र पीछे दौड़ रहे,

रमा रुके इक ठौर कहाँ, भली भांति सभी तो परिचित हैं |

पथ विपरीत मनुज क्यूँ चलता, यह प्रश्न अनुत्तरित है ||

अपने हित बाबत अपनों का, अपकार मनुज करता आया,

क्यों होता है अतिक्रमण फ़िर, जब रिश्ते तो मर्यादित हैं |

पथ विपरीत मनुज क्यूँ चलता, यह प्रश्न अनुत्तरित है ||

त्रि संधि भर जीवन है, संतोष परम धन सब जन जाने,

समग्र समेटने की उत्कंठा, ज्ञात लोभ प्रवृति वर्जित है |

पथ विपरीत मनुज क्यूँ चलता, यह प्रश्न अनुत्तरित है ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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