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कौन हुआ आज़ाद बताओ, हम-तुम, या हमको छलने वाले ?

बैठें हैं जो शीर्ष पदों पर, या फ़िर सड़क किनारे पलने वाले ||

फाँसी, गोली, जो खाये थे, उनके आज कहाँ जयकारे लगते ?

जो काबिज़ होता कुर्सी पर, है आँख मूँद सब पीछे भगते ||

भुला रहे हम उनकी क़ुर्बानी, जो थे बीज़ आज़ादी बोने वाले |

कौन हुआ आज़ाद बताओ, हम-तुम, या हमको छलने वाले ?

चंद आँखें हैं मद से बोझिल, पर आज बहुतेरी आँखें सूनी |

छप्पर बहुत दिये को तरसे, कहीं जगामग दिन-दिन दूनी ||

जो दबे आज भी पहले जैसे, या उनको पैरों से दलने वाले ?

कौन हुआ आज़ाद बताओ, हम-तुम, या हमको छलने वाले ?

भूख, गरीबी, भ्रष्टाचारी, अब इनको तांडव की आज़ादी है |

बेखौफ करो व्यभिचार यहाँ, अगर पीछे खडी जो खादी है ||

आज अराज़क मज़े उड़ाते, रोते हैं सत पथ पर चलने वाले |

कौन हुआ आज़ाद बताओ, हम-तुम, या हमको छलने वाले ?

जो हक़दार कलम, पोथी के, वो नन्हें कर कचरा बीन रहे |

अपनी तिजोरी भरने खातिर, मजलूमों के सपने छीन रहे ||

जो झूठन के अम्बार लगाते, या फ़िर पानी पर पलने वाले |

कौन हुआ आज़ाद बताओ, हम-तुम, या हमको छलने वाले ?

अगर ऐसी ही आज़ादी चाहते, तो तुमको बहुत मुबारक हो |

वरना विप्लव शंखनाद करो, क्योंकि नर हो, कर धारक हो ||

ये प्रचण्ड अनल को कहाँ सहेंगे, सूखे पत्ते से हैं जलने वाले |

कौन हुआ आज़ाद बताओ, हम-तुम, या हमको छलने वाले ?

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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