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नयन कमान, शर नज़र तुम्हारी, है दिल घायल तो देखे से |

क्या करना है अंत प्राण का, इस क़ातिल अंदाज़ अनोखे से ||

केश पाश में ऐसे उलझे, करें लाख जतन फ़िर भी ना छूटें |

कटि, कपोल, तन, लोचन के, चहुँदिश तुमने गाड़ दिए खूंटे ||

कुछ भी तो रहा नहीं हाथ हमारे, है धड़कन भी तेरे लेखे से |

क्या करना है अंत प्राण का, इस क़ातिल अंदाज़ अनोखे से ||

हम तो शिकार बने पहले ही, क्यूँ आखेटक बनकर आई हो |

मौत कहें या तुम्हें ज़िन्दगी, जो भी हो, दिल पर छाई हो ||

अब चितवन मृदुल करो प्रिये, हँसकर देखो नयन झरोखे से |

क्या करना है अंत प्राण का, इस क़ातिल अंदाज़ अनोखे से ||

माना तुम जीवन हो मेरा, है हर साँसों पर उपकार तुम्हारा |

सर्वस्व समर्पित कर बैठा हूँ, तन, मन पर अधिकार तुम्हारा ||

रहना चाहता हूँ बंधन में ही, मुझे छोड़ न देना तुम धोखे से |

क्या करना है अंत प्राण का, इस क़ातिल अंदाज़ अनोखे से ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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