Tags

, , , , , , ,

depressed teen in tunnel_113875279

आशा टूटती, अस्मत लुटती, ख़ुद को कब धिक्कारोगे |

भरी तरुणाई जोश नहीं है, फिर कब जाकर ललकारोगे ||

ये बेरहमी से वतन नोचते, दी जिनको हमने जिम्मेदारी |

सेवक शासक बन ठाठ से, है गलती इसमें अपनी सारी ||

करते रहोगे सत्कार, स्वागत, या इनको अब फटकारोगे |

भरी तरुणाई जोश नहीं है, फिर कब जाकर ललकारोगे ||

अधरों पर हास दिखावे का, मन में मैल की गाँठ लिए |

ये स्वतंत्र कुछ भी कहने को, हमको रखते काठ किए ||

यूं ही रहना है तलुवे चाटते, या अब तो इन्हें दुत्कारोगे |

भरी तरुणाई जोश नहीं है, फिर कब जाकर ललकारोगे ||

जल रहा देश, मर्यादा मिटती, क्यूँ खड़े-खड़े हो देख रहे |

अपना भाग्य लिखो स्वयं ही, मत कहो कर्म के लेख रहे ||

समय असमंजस में खोना है, या अपने होश सम्हालोगे |

भरी तरुणाई जोश नहीं है, फिर कब जाकर ललकारोगे ||

युवा निराशा दामन छोड़ो, अपनी ताक़त की पहचान करो |

मातृभूमि है सर्वस्व तुम्हारा, निज गौरव का सम्मान करो ||

क्यों बैठे फन पर पैर धराए, क्या क्रुधित नहीं फुफकारोगे |

भरी तरुणाई जोश नहीं है, फिर कब जाकर ललकारोगे ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

Advertisements