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पीत परिधान किए तन धारण, मनो प्रिय मधुमास रितु हो छाई |

सब भूषण, श्रृंगार सजे मनभावन, अति प्रीत उमंगित देह गदराई ||

आनन ओप, हास अधर अरु, छवि नयनन है, इस भांति लखाई |

मनो चंद में चपला चमक उठी हो, जब गौरी ने घूंघट ओट हटाई ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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