Tags

, , , , ,

night_and_day

है रात वही पर बात नहीं, शाप कहीं, वरदान कहीं |

है जग वही पर ज़गह नहीं, बस्ती कहीं, श्मसान कहीं ||

अनंत सफ़र का ये राही, आता और चला जाता,

देह इसे अपना माने , ये ना किसी को अपनाता ,

भ्रम आवृत मति, मानव समझे सब, पर ना समझे,

है गति वही,पर मति नहीं, आंसू कहीं, मुस्कान कहीं |

है रात वही पर बात नहीं, शाप कहीं, वरदान कहीं ||

रूधिर रंग,अस्थि,मज्ज़ा, हैं सब में एक समान बने,

रचने वाले के घर में, ना कोई अलग विधान बने,

कर्मों से मानव ने जग में, अपनी पहचान बनाई है,

है नर वही पर नज़र नहीं, संत कहीं शैतान कहीं |

है रात वही पर बात नहीं, शाप कहीं, वरदान कहीं ||

अनवरत चक्र वक़्त का चलता, ना रुका है,नहीं रुकेगा,

कोटिक यत्न करे कोई भी, ना ये थमा है,नहीं थमेगा,

अपने अपने ढंग से हमने, शब्दों की सृष्टि कर डाली,

है दिनेश वही पर देश नहीं, उदय कहीं अवसान कहीं |

है रात वही पर बात नहीं, शाप कहीं, वरदान कहीं ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

Advertisements