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अवनी रोग उपजाए अनेक तो, बहु औषधि को प्रभाव दिए |

विविधा वसुधा पे बनाने को, जन को नाना स्वभाव दिए ||

जीव को जीवन मर्म सिखाने, ईश ने वय को पड़ाव दिए |

अनर्थ करें न अति जग में, नाग को पंख ना पाँव दिए ||10||

सरिता सुंदर कानन में, अरु आनन दमक लगे प्यारी |

बिंदी अति सोहे भाल तिया, चाल में ठमक लगे प्यारी ||

शीत में गर्म, ग्रीष्म शीतल, मेह की गमक लगे प्यारी |

लाज़ भरी ललना अति सौहे, चंद की चमक लगे प्यारी ||11||

बोल ही घाव गंभीर करे, और बोल हिये की शीतलताई |

बोल ही मीत करे जग को, अरु बोल से उपजे दुश्मनताई ||

बोल से मान-सम्मान मिले, तो बोल से मिलती लघुताई |

बोल तो एक अमोल निधि, बोल ही बीज़ है सज्जनताई ||12||

Ummed Deval

Ummed Deval

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