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pyar

कहते हो तुम तो बदल गए, पर बदलाव ज़रूरी है |

कभी पास में आना लाज़िम, कभी मुनासिब दूरी है ||

शीतल और घनेरी छाया, गरमी में मन को भाती है |

चाहत कौन शीत में करता, सबको धूप सुहाती है ||

आरोप लगाने से पहले, बस इतना सा सोचो ज़रा,

मौसम के अनुकूल बदलना, जीवन की मजबूरी है |

कहते हो तुम तो बदल गए, पर बदलाव ज़रूरी है ||

देश,धर्म,समाज बदलते, नियम, कायदे, राज बदलते |

वक़्त बदलता वर्ष बदलते, हर कल और आज बदलते ||

बदलाव सनातन रीति रही है, नीयति की मंज़ूरी है |

कहते हो तुम तो बदल गए, पर बदलाव ज़रूरी है ||

ध्यान लगा तुम देखो जरा, हर चीज़ बदलती पाओगे |

पाओगे फ़िज़ा, रज़ा बदलती, तमीज बदलती पाओगे ||

बवाल मचा क्यूँ मैं बदला, रंग दुनिया बदलती पूरी है |

कहते हो तुम तो बदल गए, पर बदलाव ज़रूरी है ||

उम्मेद देवल

उम्मेद देवल

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