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भूषण वसन सुसज्जित ललना, कोमल मृदुल गात लगे |

धवल वलय, मेहँदी रंजित, तिय का अनुपम हाथ लगे ||

ध्यान कहाँ फिर औरन को, युगल नवल जब बात लगे |

संग प्रिया जब प्रीतम हो, तब प्रियकर पूनम रात लगे ||8||

अति अनुराग उमंगित ललना, सब भांति सुचिकन देह संवारी |

काम को कज्जल अखियन में, पट लाज़ को आनन उपरि डारी ||

गौन कियो पिव से मिलबा, अरु मौन की लाली अधर पर सारी |

कर दीपक मन डोल रह्यो, जीऊँ निरखत के होऊँ बलिहारी ||9||

Ummed Deval

Ummed Deval

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