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रितु अनुसार पकवान प्रिय, मति अनुसार गति मन की |

हित अनुसार बने सब रिश्ते, रुचि अनुसार छवि तन की ||

छांह बने रवि के अनुसार ही, जल अनुसार घटा घन की |

गेह बने नेह के अनुसार ही, तरू अनुसार छटा वन की ||5||

कामिनी सो अति सुंदर है, जो नैनन लाज़ समाय रखे |

द्वार वही अति शोभित है, जो ममता मांय पठाय रखे ||

ललित वही है हास्य अति, जो रोदित को मुस्काय रखे |

है चारु वही चारों वर्णों में, जो दीन सदा अपनाय रखे ||6||

सत्य गए ना साख़ बचे, अरु जोश गए ना बचे तरुणाई |

लाज़ गए ना बचे ललना, अरु भाव गए ना बचे भक्ताई ||

क्षुधा गए ना स्वाद बचे, अरु क्षमा गए ना बचे प्रभुताई |

रस के गए ना काव्य बचे, अरु प्रीत गए ना बचे सरसाई ||7||

Ummed Deval

Ummed Deval

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